PCOS यानी Polycystic Ovary Syndrome और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज यानि की PCOD आज के समय में महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे चर्चित समस्याओं में से एक है हम आपको बता दे की PCOS एक ऐसी hormonal और metabolic condition है। जिसमे महिलाओं में पाए जाने वाले androgen hormones का level बढ़ जाता है और ovulation irregular हो जाता है। इसके कारण periods irregular होने, acne, oily skin, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल और pregnancy में difficulty जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।
वही PCOD भी महिलाओं में होने वाला एक आम डिसऑर्डर है इसमें महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे परिपक्व अंडे नहीं बन पाते और वे छोटे-छोटे सिस्ट (Cysts) का रूप लेने लगते हैं जिससे महिलाओं में पीरियड्स का समय पर न होना या फिर बहुत अधिक रक्त का स्त्राव होना ऐसी समस्याए होती है आज के हमारे इस लेख का उद्देश्य इस विषय पर आपको सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करना है यदि आप भी इस समस्या से जूझ रही है तब तो यह लेख आपके लिए और भी उपयोगी हो सकता है आपको जानकारी के लेख प्रयागराज स्थित विश्व्श्रद्धा की जानी मानी महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आकांक्षा श्रीवास्तव् के परामर्श द्वारा तैयार किया गया जिन्हे चिकित्सा के क्षेत्र अपने योगदान के लिए उत्तर प्रदश सरकार के द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका।
अपने आज का लेख शुरू करने से पहले हम आपको बतादे यदि आप प्रयागराज या फिर उसके आस पास के शहर में रहती है और माहवारी से जुडी किसी भी तरह की समस्या से परेशां है और एलोपैथी मेडिसिन्स के जरिये इलाज करवा करके थक चुकी है तो आज ही हमारी वेबसाइट पर दिए गए पर दिए गए नंबर पर हमे कॉल करे। चलिए अपना आज का यह लेख अभी आज ही शुरू करे।
1. Pregnancy ठहरने में समय लगना
PCOS में pregnancy से जुड़ी पहली परेशानी अक्सर conception से पहले ही सामने आती है। इसका मुख्य कारण irregular ovulation है, क्योंकि PCOS में hormonal imbalance की वजह से हर menstrual cycle में ovulation नियमित रूप से नहीं होता। कभी ovulation देर से होता है और कभी किसी cycle में ovulation नहीं होता, जिसकी वजह से fertile days का अनुमान लगाना भी मुश्किल हो जाता है। जब ovulation नियमित नहीं रहता, तो sperm और egg के मिलने का सही समय भी हर महीने एक जैसा नहीं रहता और इसी कारण pregnancy ठहरने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। फिर भी PCOS को infertility समझना सही नहीं है, क्योंकि बहुत-सी महिलाएँ बिना fertility treatment के भी naturally conceive करती हैं। अगर लंबे समय तक pregnancy नहीं ठहरती, तो gynecologist ovulation और दूसरे fertility factors की जांच करके आगे का treatment तय करते हैं।
2. Miscarriage का risk बढ़ना
PCOS के साथ pregnancy होने के बाद miscarriage को लेकर भी थोड़ी अतिरिक्त सावधानी रखी जाती है। Research में PCOS वाली pregnancies में miscarriage का risk सामान्य pregnancy की तुलना में कुछ अधिक पाया गया है, जिसका संबंध hormonal imbalance, insulin resistance और दूसरे metabolic factors से जोड़ा जाता है। 2023 guideline में शामिल meta-analysis के अनुसार, PCOS वाली महिलाओं में miscarriage का odds लगभग 1.5 गुना था। हालांकि, इस आंकड़े को किसी एक महिला की pregnancy के outcome की भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि risk बढ़ने का अर्थ miscarriage होना तय होना नहीं है। Pregnancy positive आने के बाद नियमित prenatal care, डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांचों पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण रहता है, क्योंकि इसी निगरानी से pregnancy की progress को सही तरीके से track किया जाता है।
3. Gestational Diabetes का risk बढ़ना
PCOS और insulin resistance के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध देखा जाता है, जिसकी वजह से PCOS वाली महिलाओं में pregnancy के दौरान blood sugar से जुड़ी समस्याओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। Insulin resistance में शरीर insulin का इस्तेमाल उतनी प्रभावी तरह से नहीं कर पाता, इसलिए blood sugar को नियंत्रित रखने के लिए शरीर को ज्यादा insulin की जरूरत पड़ती है। Pregnancy के दौरान hormonal changes के कारण insulin resistance पहले से बढ़ती है और जब इसके साथ PCOS भी मौजूद हो, तो gestational diabetes यानी pregnancy के दौरान होने वाली diabetes का risk और बढ़ जाता है। 2023 के evidence review में PCOS वाली महिलाओं में gestational diabetes का odds लगभग 2.35 गुना पाया गया। इसी वजह से pregnancy के दौरान blood sugar की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है और अगर gestational diabetes सामने आती है, तो diet, physical activity, regular glucose monitoring और जरूरत के अनुसार medication के जरिए इसे manage किया जाता है।
4. High BP और Preeclampsia
PCOS वाली pregnancy में blood pressure पर नजर रखना भी जरूरी होता है, क्योंकि कुछ महिलाओं में pregnancy के दौरान high blood pressure और preeclampsia जैसी complications का risk बढ़ा हुआ पाया गया है। PCOS से जुड़ी insulin resistance और metabolic problems इस risk में भूमिका निभा सकती हैं, जबकि pregnancy के दौरान होने वाले दूसरे बदलाव भी blood pressure को प्रभावित करते हैं। 2023 के meta-analysis में PCOS वाली महिलाओं में pregnancy-induced hypertension का odds लगभग 2.2 गुना पाया गया। इसी कारण antenatal visits के दौरान blood pressure की नियमित जांच की जाती है, ताकि किसी भी असामान्य बदलाव को शुरुआत में ही पहचाना जा सके। अगर pregnancy के दौरान तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधला दिखाई देना, अचानक ज्यादा सूजन या blood pressure बढ़ने जैसी समस्या सामने आए, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी रहता है।
5. समय से पहले delivery का risk
PCOS वाली महिलाओं में pregnancy के 37 सप्ताह पूरे होने से पहले baby के जन्म यानी preterm birth का risk भी कुछ studies में अधिक पाया गया है। इस risk को केवल PCOS से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि pregnancy के दौरान high blood pressure, gestational diabetes और दूसरी complications भी preterm delivery की संभावना को प्रभावित करती हैं। इसी वजह से PCOS वाली pregnancy में मां की health के साथ baby की growth और pregnancy की overall progress पर भी लगातार नजर रखी जाती है। नियमित antenatal check-ups के दौरान डॉक्टर pregnancy की स्थिति का assessment करते हैं और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त monitoring की सलाह देते हैं, जिससे किसी भी complication की पहचान समय रहते हो सके।
6. Baby की growth से जुड़ी समस्याएँ
कुछ PCOS pregnancies में baby की growth से जुड़ी समस्याओं का risk भी सामान्य pregnancy की तुलना में अधिक पाया गया है। इनमें small-for-gestational-age (SGA) और low birth weight जैसी स्थितियां शामिल हैं, जिनमें baby अपनी gestational age के हिसाब से अपेक्षित आकार या वजन से छोटा रह सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि PCOS वाली हर महिला के baby का weight कम रहेगा, क्योंकि baby की growth पर मां का nutrition, blood pressure, blood sugar, placenta और कई दूसरे factors का भी असर पड़ता है। इसी वजह से pregnancy के दौरान डॉक्टर जरूरत के अनुसार ultrasound और growth scans की सलाह देते हैं, जिनके माध्यम से baby की growth और development पर नजर रखी जाती है। अगर growth में किसी तरह का बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर pregnancy की स्थिति के अनुसार आगे की monitoring तय करते हैं।
7. C-section की संभावना बढ़ना
PCOS वाली महिलाओं में cesarean delivery यानी C-section का risk भी कुछ research में सामान्य pregnancy की तुलना में अधिक पाया गया है। इसके पीछे केवल PCOS को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि delivery का तरीका pregnancy के दौरान कई अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करता है। Gestational diabetes, high blood pressure, baby की position, baby की growth और delivery के समय मां और baby की स्थिति जैसे factors भी vaginal delivery या C-section के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए PCOS होने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि delivery C-section से ही होगी। अगर pregnancy सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है और vaginal delivery के खिलाफ कोई medical indication मौजूद नहीं है, तो normal vaginal delivery भी संभव रहती है।
PCOS के साथ pregnancy में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
PCOS के साथ pregnancy को लेकर सबसे जरूरी बात यह समझना है कि बढ़ा हुआ risk और निश्चित complication एक ही बात नहीं हैं। PCOS वाली बहुत-सी महिलाएँ healthy pregnancy पूरी करती हैं और स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं, लेकिन pregnancy के दौरान कुछ जांचों और monitoring पर सामान्य से ज्यादा ध्यान दिया जाता है। नियमित antenatal check-ups, blood pressure और blood sugar की monitoring, balanced diet, डॉक्टर की सलाह के अनुसार physical activity और baby की growth की समय-समय पर जांच pregnancy care का महत्वपूर्ण हिस्सा रहती है। अगर पहले से diabetes, high BP या कोई दूसरी medical problem मौजूद हो, तो उसकी जानकारी gynecologist को देना भी जरूरी है, क्योंकि पूरी medical history के आधार पर ही pregnancy care को बेहतर तरीके से plan किया जाता है। कुल मिलाकर, PCOS के साथ pregnancy में थोड़ी अतिरिक्त निगरानी की जरूरत रहती है, लेकिन सही medical care और नियमित monitoring के साथ healthy pregnancy पूरी करना बिल्कुल संभव है।