Arthritis Patients को क्या नहीं खाना चाहिए? वैज्ञानिक शोधों पर आधारित संपूर्ण जानकारी
आर्थराइटिस (गठिया) दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। अधिकांश लोग आर्थराइटिस के उपचार के लिए दवाओं और चिकित्सकीय सलाह पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई वैज्ञानिक शोध यह दर्शाते हैं कि खान-पान और जीवनशैली भी इस बीमारी के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पिछले कुछ दशकों में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में किए गए अनेक शोधों से यह संकेत मिला है कि कुछ खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन को बढ़ा सकते हैं, जबकि कुछ खाद्य पदार्थ सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि आर्थराइटिस के मरीजों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि उन्हें किन चीजों का सेवन कम करना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आर्थराइटिस के मरीजों को क्या नहीं खाना चाहिए, कौन-से खाद्य पदार्थ सूजन को बढ़ा सकते हैं, और इस विषय पर दुनिया भर में हुए प्रमुख वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं।
इस विषय पर विशेषज्ञों की क्या राय है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पोषण वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्थराइटिस केवल जोड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में होने वाली विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं से भी जुड़ी होती है। विशेष रूप से सूजन (Inflammation) इस बीमारी के प्रमुख कारणों और लक्षणों में से एक है।
वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ाने वाले रसायनों के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं, जबकि कुछ खाद्य पदार्थ सूजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार को आर्थराइटिस प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों से क्यों बचना चाहिए?
आर्थराइटिस के मरीजों को अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने की सलाह दी जाती है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि अधिक मात्रा में चीनी का सेवन शरीर में सूजन बढ़ाने वाले रसायनों के उत्पादन को बढ़ा सकता है।
कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेट वाले जूस, मिठाइयाँ, केक, पेस्ट्री, कैंडी, चॉकलेट सिरप तथा अन्य मीठे पेय पदार्थों में चीनी की मात्रा काफी अधिक होती है। इनका अधिक सेवन न केवल सूजन को बढ़ा सकता है, बल्कि वजन बढ़ाने का कारण भी बन सकता है।
जब शरीर का वजन बढ़ता है तो घुटनों, कूल्हों और अन्य जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द और असुविधा बढ़ सकती है। इसलिए विशेषज्ञ आर्थराइटिस के मरीजों को चीनी का सेवन नियंत्रित रखने की सलाह देते हैं।
प्रोसेस्ड और फास्ट फूड का क्या प्रभाव पड़ता है?
आज की व्यस्त जीवनशैली में फास्ट फूड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि विभिन्न शोधों में यह पाया गया है कि प्रोसेस्ड और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन शरीर में दीर्घकालिक सूजन को बढ़ावा दे सकता है।
बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स, प्रोसेस्ड मीट और अन्य जंक फूड में अक्सर ट्रांस फैट, अतिरिक्त नमक, परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और कृत्रिम संरक्षक पाए जाते हैं। ये तत्व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं माने जाते और आर्थराइटिस के लक्षणों को अधिक गंभीर बना सकते हैं।
यदि आप आर्थराइटिस से पीड़ित हैं, तो ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना आपके लिए लाभदायक हो सकता है।
तली-भुनी चीजें क्यों नुकसान पहुंचा सकती हैं?
समोसा, कचौड़ी, पकोड़े, चिप्स और अन्य तली-भुनी चीजें भारतीय खान-पान का लोकप्रिय हिस्सा हैं। लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बार-बार गर्म किए गए तेल में तैयार खाद्य पदार्थ शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ा सकते हैं।
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह स्थिति है जिसमें शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्थिति सूजन को बढ़ाने और कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने का कारण बन सकती है।
यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से अधिक मात्रा में तली-भुनी चीजों का सेवन करता है, तो इससे जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए आर्थराइटिस के मरीजों को ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।
अधिक नमक का सेवन क्यों हो सकता है हानिकारक?
नमक हमारे भोजन का एक आवश्यक हिस्सा है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि अत्यधिक नमक का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
आर्थराइटिस की कुछ अवस्थाएँ, विशेष रूप से रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ऑटोइम्यून प्रकृति की होती हैं। ऐसे में अत्यधिक नमक का सेवन शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट फूड और अन्य प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा सामान्यतः अधिक होती है। इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का प्रभाव
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिन्हें प्रसंस्करण के दौरान उनके प्राकृतिक पोषक तत्वों से काफी हद तक वंचित कर दिया जाता है। मैदा, व्हाइट ब्रेड, बिस्कुट, पिज्जा बेस, केक और बर्गर बन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
ये खाद्य पदार्थ रक्त शर्वरा के स्तर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि बार-बार ब्लड शुगर का बढ़ना शरीर में सूजन संबंधी प्रक्रियाओं को सक्रिय कर सकता है।
इसी कारण विशेषज्ञ साबुत अनाजों जैसे गेहूं, जौ, ओट्स और ब्राउन राइस को अधिक प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं, क्योंकि ये धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट पर क्या कहते हैं शोध?
रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अभी भी शोध जारी हैं। हालांकि कई अध्ययनों में इनके अत्यधिक सेवन को सूजन तथा हृदय संबंधी रोगों के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।
मटन, सॉसेज, सलामी, बेकन और अन्य प्रोसेस्ड मीट उत्पादों में संतृप्त वसा तथा कुछ संरक्षक तत्व पाए जाते हैं, जो कुछ लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ा सकते हैं।
विशेष रूप से गाउट से पीड़ित मरीजों को इन खाद्य पदार्थों का सेवन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
आर्थराइटिस के मरीजों के लिए शराब का सेवन क्यों जोखिम भरा हो सकता है?
शराब शरीर की कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। विशेष रूप से गाउट आर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में शराब का सेवन यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है।
जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, तो जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। यही कारण है कि गाउट के मरीजों को शराब के सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
यदि कोई व्यक्ति आर्थराइटिस से पीड़ित है और नियमित रूप से शराब का सेवन करता है, तो उसे अपने चिकित्सक से इस विषय में सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
ओमेगा-6 फैटी एसिड का संतुलन भी जरूरी है
कुछ रिफाइंड वनस्पति तेलों में ओमेगा-6 फैटी एसिड अधिक मात्रा में पाया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भोजन में ओमेगा-6 की मात्रा बहुत अधिक हो जाए और ओमेगा-3 का संतुलन न बना रहे, तो शरीर में सूजन बढ़ सकती है।
हालांकि ओमेगा-6 स्वयं हानिकारक नहीं है, लेकिन इसका अत्यधिक असंतुलित सेवन स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए संतुलित और विविध आहार को सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।
मोटापा और आर्थराइटिस के बीच सबसे मजबूत संबंध
यदि आर्थराइटिस पर हुए वैश्विक शोधों का विश्लेषण किया जाए, तो मोटापे और ऑस्टियोआर्थराइटिस के बीच सबसे मजबूत वैज्ञानिक संबंध देखने को मिलता है।
जब शरीर का वजन बढ़ता है, तो घुटनों, कूल्हों और अन्य भार वहन करने वाले जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे कार्टिलेज तेजी से घिस सकता है और दर्द, सूजन तथा चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने कुल शरीर के वजन का केवल 5 से 10 प्रतिशत भी कम कर ले, तो उसके दर्द, सूजन और दैनिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
आर्थराइटिस के मरीजों को क्या खाना चाहिए?
आर्थराइटिस के मरीजों को केवल उन खाद्य पदार्थों के बारे में ही नहीं जानना चाहिए जिनसे उन्हें बचना है, बल्कि उन खाद्य पदार्थों की जानकारी भी होनी चाहिए जो उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, मेथी, सरसों और चौलाई शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करती हैं। इसी प्रकार सेब, संतरा, अमरूद, अनार और विभिन्न प्रकार के फल शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायता कर सकते हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट और फैटी फिश भी सूजन को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं।
इसके अतिरिक्त हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन और अदरक में मौजूद प्राकृतिक यौगिक भी सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। वहीं ओट्स, जौ, ब्राउन राइस और साबुत गेहूं जैसे अनाज बेहतर पाचन और संतुलित ऊर्जा प्रदान करते हैं।
एक संतुलित, पौष्टिक और विविध आहार आर्थराइटिस के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस विषय पर दुनिया भर में हुए प्रमुख शोध क्या कहते हैं?
आर्थराइटिस और खान-पान के बीच संबंध को समझने के लिए पिछले कई दशकों में दुनिया के विभिन्न देशों में अनेक वैज्ञानिक शोध किए गए हैं। इन शोधों का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि कौन-से खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन को बढ़ाते हैं और कौन-से खाद्य पदार्थ सूजन को नियंत्रित करने में सहायता कर सकते हैं। आइए, इस विषय पर हुए प्रमुख शोधों को विस्तार से समझते हैं।
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1. चीनी और सूजन पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का शोध
अमेरिका की प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्था हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सहित कई शोध संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों में पाया गया कि अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन शरीर में सूजन से जुड़े विभिन्न जैविक संकेतकों (Inflammatory Markers) को बढ़ा सकता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों, शीतल पेयों और अत्यधिक चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, उनमें सूजन से संबंधित समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिक चीनी शरीर में Advanced Glycation End Products (AGEs) नामक यौगिकों के निर्माण को बढ़ा सकती है। ये यौगिक शरीर के ऊतकों और जोड़ों में सूजन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि आर्थराइटिस के मरीजों को चीनी का सेवन नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है।
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2. पश्चिमी आहार शैली (Western Diet) पर यूरोप और अमेरिका का संयुक्त अध्ययन
यूरोप और अमेरिका में किए गए कई शोधों में तथाकथित “Western Diet” का अध्ययन किया गया। इस प्रकार के आहार में फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी, परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस प्रकार का आहार शरीर में दीर्घकालिक सूजन को बढ़ावा दे सकता है। नियमित रूप से बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, प्रोसेस्ड स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में सूजन संबंधी समस्याएँ अधिक देखी गईं।
इन अध्ययनों ने यह संकेत दिया कि स्वस्थ और संतुलित आहार अपनाना सूजन संबंधी रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
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3. तले हुए खाद्य पदार्थों पर ब्रिटेन में किए गए अध्ययन
ब्रिटेन में किए गए कुछ अध्ययनों में यह देखा गया कि बार-बार गर्म किए गए तेल में तैयार किए गए खाद्य पदार्थ शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ा सकते हैं।
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह स्थिति है जिसमें शरीर में फ्री रेडिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स के बीच संतुलन बिगड़ जाता है। इससे कोशिकाओं को नुकसान पहुँच सकता है और सूजन की प्रक्रिया अधिक सक्रिय हो सकती है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि अत्यधिक तली-भुनी चीजों का सेवन करने से सूजन संबंधी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए आर्थराइटिस के मरीजों को ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने की सलाह दी जाती है।
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4. नमक और ऑटोइम्यून रोगों पर जर्मनी का शोध
जर्मनी में हुए कुछ महत्वपूर्ण अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने पाया कि अत्यधिक नमक प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
विशेष रूप से ऑटोइम्यून रोगों के संदर्भ में यह विषय काफी चर्चा का केंद्र रहा है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि अत्यधिक नमक कुछ परिस्थितियों में इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इस विषय पर अभी और विस्तृत शोध किए जाने की आवश्यकता है।
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5. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और सूजन पर कनाडा का अध्ययन
कनाडा के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों में पाया गया कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा, वहाइट ब्रेड और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ा सकते हैं।
बार-बार ब्लड शुगर का तेजी से बढ़ना शरीर में सूजन संबंधी प्रक्रियाओं को सक्रिय कर सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ साबुत अनाजों को बेहतर विकल्प मानते हैं, क्योंकि वे धीरे-धीरे पचते हैं और रक्त शर्करा के स्तर को अधिक संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं।
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6. रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट पर अमेरिकी शोध
America में हुए कई पोषण संबंधी अध्ययनों में यह पाया गया कि रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट का अत्यधिक सेवन सूजन से जुड़े कुछ जैविक संकेतकों को बढ़ा सकता है।
हालांकि सभी शोधों के परिणाम पूरी तरह एक जैसे नहीं रहे हैं, लेकिन कई वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रोसेस्ड मीट में मौजूद कुछ संरक्षक पदार्थ और रसायन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
इसी कारण मटन, सॉसेज, सलामी और अन्य प्रोसेस्ड मीट उत्पादों का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।
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7. शराब और गाउट पर जापान का शोध
जापान में किए गए कई अध्ययनों में यह पाया गया कि अत्यधिक शराब का सेवन शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है।
गाउट आर्थराइटिस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से यूरिक एसिड के बढ़े हुए स्तर से जुड़ा होता है। जब यूरिक एसिड शरीर में अधिक मात्रा में जमा होने लगता है, तो यह जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में एकत्रित होकर दर्द और सूजन का कारण बन सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि शराब का सेवन करने वाले लोगों में गाउट के अटैक की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
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8. ओमेगा-6 और सूजन पर ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन
ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में किए गए कुछ अध्ययनों में यह देखा गया कि यदि भोजन में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा अत्यधिक हो जाए और ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा कम हो, तो शरीर में सूजन बढ़ सकती है।
हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि ओमेगा-6 स्वयं हानिकारक नहीं है। वास्तव में यह शरीर के लिए आवश्यक फैटी एसिड में से एक है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब भोजन में ओमेगा-6 और ओमेगा-3 के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।
इसीलिए विशेषज्ञ संतुलित आहार पर विशेष जोर देते हैं।
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9. मोटापा और ऑस्टियोआर्थराइटिस पर सबसे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण
आर्थराइटिस के क्षेत्र में सबसे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण मोटापे और ऑस्टियोआर्थराइटिस के बीच पाए गए हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में किए गए अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि बढ़ा हुआ वजन घुटनों और कूल्हों जैसे भार वहन करने वाले जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
इसके परिणामस्वरूप कार्टिलेज का क्षरण तेजी से हो सकता है और दर्द, सूजन तथा चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
शोध बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति अपने कुल शरीर के वजन का केवल 5 से 10 प्रतिशत भी कम कर ले, तो उसके दर्द, गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है।
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10. ओमेगा-3 फैटी एसिड पर जापान, कनाडा और नॉर्वे का शोध
जापान, कनाडा और नॉर्वे में किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया कि ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर में सूजन पैदा करने वाले कुछ रसायनों की सक्रियता को कम करने में सहायता कर सकता है।
अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट और फैटी फिश जैसे खाद्य पदार्थ ओमेगा-3 के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
कुछ अध्ययनों में यह भी देखा गया कि नियमित रूप से ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में जोड़ों की जकड़न और दर्द के स्तर में सुधार हो सकता है।
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11. हल्दी और करक्यूमिन पर भारत तथा अमेरिका का शोध
भारत और अमेरिका में किए गए अनेक अध्ययनों में हल्दी में पाए जाने वाले सक्रिय यौगिक करक्यूमिन (Curcumin) पर विशेष ध्यान दिया गया है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि करक्यूमिन में प्राकृतिक सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। कुछ अध्ययनों में यह देखा गया कि करक्यूमिन का नियमित सेवन करने वाले लोगों में दर्द और सूजन के स्तर में सकारात्मक बदलाव देखे गए।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी सप्लीमेंट का उपयोग करने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
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12. गट माइक्रोबायोम और रूमेटॉइड आर्थराइटिस पर नई रिसर्च
हाल के वर्षों में अमेरिका, स्वीडन और जापान के वैज्ञानिकों ने गट माइक्रोबायोम अर्थात आंतों में रहने वाले सूक्ष्म जीवों पर व्यापक शोध किए हैं।
इन अध्ययनों में पाया गया कि हमारी आंतों का स्वास्थ्य प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। कुछ शोधों में यह देखा गया कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित लोगों की आंतों में पाए जाने वाले कुछ बैक्टीरिया सामान्य लोगों की तुलना में अलग हो सकते हैं।
हालांकि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर आर्थराइटिस के उपचार और प्रबंधन के नए तरीके विकसित किए जा सकते हैं।
इन सभी शोधों से क्या निष्कर्ष निकलता है?
दुनिया भर में हुए शोधों का समग्र विश्लेषण यह दर्शाता है कि आर्थराइटिस केवल जोड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि यह हमारे खान-पान, वजन, प्रतिरक्षा प्रणाली और संपूर्ण जीवनशैली से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
हालांकि कोई एक ऐसा खाद्य पदार्थ नहीं है जो आर्थराइटिस को पूरी तरह ठीक कर सके या पूरी तरह बढ़ा सके, लेकिन यह स्पष्ट है कि संतुलित आहार, स्वस्थ वजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और सूजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज़ करने से इस बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
इसीलिए विशेषज्ञ आर्थराइटिस के मरीजों को संतुलित, पौष्टिक और विविध आहार अपनाने की सलाह देते हैं, ताकि वे अपने जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकें और जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकें।
आर्थराइटिस के मरीजों को सामान्यतः चीनी पूरी तरह बंद करने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन करने से बचना चाहिए। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक चीनी शरीर में सूजन बढ़ाने वाले कारकों को सक्रिय कर सकती है। इसलिए कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाइयाँ, केक, पेस्ट्री और अन्य अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना अधिक उचित माना जाता है।
फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट, अतिरिक्त नमक और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो सकती है। विभिन्न शोधों में यह पाया गया है कि ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ आर्थराइटिस के मरीजों को फास्ट फूड का नियमित सेवन करने से बचने की सलाह देते हैं.
हाँ, विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामलों में बढ़ा हुआ वजन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि मोटापा घुटनों और कूल्हों के जोड़ों को अधिक प्रभावित कर सकता है। कई शोध यह भी बताते हैं कि वजन कम करने से दर्द और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार देखा जा सकता है।
वर्तमान वैज्ञानिक शोधों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि दूध और दही सभी आर्थराइटिस मरीजों के लिए हानिकारक हैं। यदि किसी व्यक्ति को डेयरी उत्पादों से कोई विशेष समस्या नहीं है, तो वह सीमित मात्रा में दूध, दही और पनीर का सेवन कर सकता है। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत संवेदनशीलता महसूस होती है, तो उसे अपने चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
सामान्य मात्रा में चावल का सेवन अधिकांश आर्थराइटिस मरीजों के लिए सुरक्षित माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की बजाय ब्राउन राइस या अन्य साबुत अनाजों को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं, क्योंकि वे अधिक पोषक तत्व प्रदान करते हैं और रक्त शर्करा को संतुलित रखने में सहायता कर सकते हैं।
हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एक प्राकृतिक सूजनरोधी यौगिक माना जाता है। भारत और अमेरिका में हुए कई अध्ययनों में इसके संभावित लाभों पर शोध किया गया है। हालांकि हल्दी को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता, लेकिन इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
सभी मरीजों के लिए मांसाहार छोड़ना आवश्यक नहीं है। हालांकि कुछ शोधों में रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट के अत्यधिक सेवन को सूजन से जोड़ा गया है। इसलिए विशेषज्ञ इनके सेवन को सीमित रखने की सलाह देते हैं। संतुलित मात्रा में प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
नहीं, वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि केवल खान-पान में बदलाव करके आर्थराइटिस को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। हालांकि संतुलित आहार, स्वस्थ वजन, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय उपचार के साथ सही खान-पान अपनाने से लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आर्थराइटिस के मरीजों को अत्यधिक चीनी, प्रोसेस्ड फूड, तली-भुनी चीजों और अत्यधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए। इसके साथ ही हरी सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना लाभकारी माना जाता है।
नहीं, आर्थराइटिस के विभिन्न प्रकार होते हैं और प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति भी अलग होती है। इसलिए किसी भी विशेष डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से परामर्श करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।
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