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Joint Pain का कारण Calcium Deficiency है या कुछ और? जानिए डॉक्टर की राय

Jun 12, 2026 shiv seo 1 min read Health
क्या Calcium Deficiency से Joint Pain होता है?

क्या Calcium Deficiency से Joint Pain होता है?

जोड़ों का दर्द आज भारत में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। घुटनों में दर्द, चलने-फिरने में असुविधा, सीढ़ियाँ चढ़ने में परेशानी या सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न जैसी शिकायतें अक्सर लोगों को परेशान करती हैं। ऐसी स्थिति में अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि उनके शरीर में कैल्शियम की कमी हो गई है और यही उनके दर्द का मुख्य कारण है। लेकिन क्या वास्तव में हर Joint Pain के पीछे Calcium Deficiency ही जिम्मेदार होती है?

इसी सवाल का उत्तर जानने के लिए हमारी टीम ने झूंसी, प्रयागराज स्थित Vishw Shraddha Hospital की वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक एवं Joint Pain और Arthritis Specialist डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव से विस्तार से बातचीत की। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि जोड़ों के दर्द और कैल्शियम की कमी के बीच संबंध अवश्य होता है, लेकिन दोनों को हमेशा एक-दूसरे का पर्याय मान लेना सही नहीं है।

डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव के अनुसार कैल्शियम एक महत्वपूर्ण खनिज है, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिलता, तो हड्डियों की मजबूती धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को हड्डियों में दर्द, कमजोरी और कई बार जोड़ों के आसपास असुविधा महसूस हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल जोड़ों में दर्द होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति कैल्शियम की कमी से ही पीड़ित है।

उन्होंने आगे बताया कि उनके पास प्रतिदिन ऐसे कई मरीज आते हैं जो घुटनों या अन्य जोड़ों के दर्द को सीधे कैल्शियम की कमी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन जब उनकी जांच की जाती है, तो कई मामलों में Osteoarthritis, Rheumatoid Arthritis, Vitamin D Deficiency, बढ़ा हुआ वजन, पुरानी चोट या शरीर में बढ़ी हुई सूजन जैसी समस्याएं वास्तविक कारण के रूप में सामने आती हैं। यही वजह है कि किसी भी मरीज में Joint Pain के सही कारण की पहचान करना उपचार की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

बातचीत के दौरान डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान कैल्शियम और Vitamin D दोनों को हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण मानता है। यदि शरीर में Vitamin D की कमी हो, तो पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम लेने के बावजूद उसका सही अवशोषण नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप कई मरीज कैल्शियम सप्लीमेंट लेने के बाद भी अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं कर पाते और उनकी समस्या बनी रहती है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इस विषय को समझाते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश Joint Pain का संबंध वात दोष के असंतुलन से माना जाता है। जब शरीर में वात बढ़ जाता है, तो जोड़ों में रूखापन, जकड़न, दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएं विकसित होने लगती हैं। इसलिए आयुर्वेद केवल कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोग के मूल कारण की पहचान करके समग्र उपचार पर जोर देता है।

डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार जोड़ों में दर्द बना रहता है, तो उसे केवल अनुमान के आधार पर कैल्शियम सप्लीमेंट लेना शुरू नहीं करना चाहिए। इसके बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए, ताकि दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके और उसी के अनुरूप प्रभावी उपचार प्राप्त किया जा सके।

इस विषय से जुड़े वैज्ञानिक शोधों के निष्कर्ष

कैल्शियम की कमी और जोड़ों के दर्द के बीच संबंध को समझने के लिए दुनिया की कई प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थाओं और रिसर्च संगठनों ने वर्षों तक अध्ययन किए हैं। इन अध्ययनों का उद्देश्य यह जानना था कि शरीर में कैल्शियम की कमी हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करती है। नीचे विश्व की प्रमुख संस्थाओं द्वारा प्रकाशित शोधों और उनके निष्कर्षों का विस्तृत सार प्रस्तुत किया गया है।

  • 1. World Health Organization (WHO)

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हड्डियों के स्वास्थ्य और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका पर कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। WHO की “Vitamin and Mineral Requirements in Human Nutrition” रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक कैल्शियम की कमी बने रहने से हड्डियों का घनत्व और मजबूती प्रभावित होने लगती है।

    WHO के अनुसार जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में कैल्शियम के अवशोषण की क्षमता कम होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप घुटनों, रीढ़ और अन्य वजन सहने वाले जोड़ों को सहारा देने वाली हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। जब यह कमजोरी बढ़ती है, तो जोड़ों का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे मस्कुलोस्केलेटल दर्द विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • 2. National Institutes of Health (NIH), USA

    दुनिया की सबसे बड़ी मेडिकल रिसर्च संस्थाओं में शामिल NIH ने कैल्शियम और हड्डियों के स्वास्थ्य पर अनेक क्लीनिकल अध्ययन किए हैं। इन अध्ययनों में पाया गया कि जब रक्त में कैल्शियम का स्तर कम होने लगता है, तो शरीर Parathyroid Hormone (PTH) का स्राव बढ़ा देता है।

    यह hormone शरीर की हड्डियों से कैल्शियम निकालकर रक्त में पहुंचाने का कार्य करता है। यदि यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहे, तो जोड़ों के नीचे स्थित हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। NIH के शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसी स्थिति जोड़ों के घिसाव और दर्द के जोखिम को बढ़ा सकती है।

  • 3. Harvard Medical School

    हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने पोषण, ऑस्टियोपोरोसिस और जोड़ों के स्वास्थ्य के संबंधों पर लंबे समय तक अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल कैल्शियम का पर्याप्त सेवन करना ही पर्याप्त नहीं होता।

    अध्ययनों में पाया गया कि यदि कैल्शियम की कमी के साथ-साथ विटामिन D और मैग्नीशियम की भी कमी हो, तो जोड़ों के सामान्य कार्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे जोड़ों के आसपास सूजन बढ़ने और दर्द की समस्या गंभीर होने की संभावना अधिक हो जाती है।

  • 4. Mayo Clinic, USA

    मेयो क्लिनिक के शोधकर्ताओं ने पाया कि कैल्शियम की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याएं हमेशा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। कई बार शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि व्यक्ति उन्हें सामान्य थकान या उम्र का प्रभाव समझकर नजरअंदाज कर देता है।

    शोध के अनुसार कैल्शियम की कमी मांसपेशियों में खिंचाव और न्यूरोमस्कुलर असंतुलन पैदा कर सकती है। जब जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं, तो उनका अतिरिक्त दबाव जोड़ों पर पड़ता है, जिससे समय के साथ दर्द विकसित हो सकता है।

  • 5. European Calcified Tissue Society (ECTS)

    यूरोप की इस प्रतिष्ठित संस्था ने हड्डियों और मिनरल मेटाबॉलिज्म पर अनेक अध्ययन किए हैं। प्रकाशित शोधों में यह पाया गया कि कैल्शियम और विटामिन K2 का निम्न स्तर कुछ मरीजों में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस की गंभीरता से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।

    शोधकर्ताओं के अनुसार जब हड्डियों का सामान्य पुनर्निर्माण प्रभावित होता है, तो जोड़ों के किनारों पर असामान्य हड्डीय संरचनाएं विकसित हो सकती हैं। ये संरचनाएं कई मामलों में दर्द और चलने-फिरने में असुविधा का कारण बनती हैं।

  • 6. Johns Hopkins Medicine

    जॉन्स हॉपकिन्स के शोधकर्ताओं ने कैल्शियम मेटाबॉलिज्म और जोड़ों की कार्यक्षमता के बीच संबंधों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि शरीर में कैल्शियम संतुलन बिगड़ने पर मांसपेशियों, टेंडन्स और लिगामेंट्स के कार्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

    इस प्रभाव के कारण जोड़ों में जकड़न बढ़ सकती है और सुबह के समय चलने-फिरने में अधिक कठिनाई महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कैल्शियम संतुलन को जोड़ों की गतिशीलता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • 7. International Osteoporosis Foundation (IOF)

    IOF द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार कैल्शियम की कमी केवल बुजुर्गों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि युवाओं में भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है।

    रिपोर्ट बताती है कि जब हड्डियों की संरचना कमजोर होने लगती है, तो शरीर का वजन विभिन्न जोड़ों पर असमान रूप से पड़ने लगता है। इससे घुटनों, टखनों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, जो आगे चलकर दर्द का कारण बन सकता है।

  • 8. Arthritis Foundation, USA

    आर्थराइटिस फाउंडेशन ने जोड़ों की बीमारियों और पोषण के संबंधों पर कई अध्ययन किए हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि संतुलित पोषण जोड़ों के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    संस्था के अनुसार जिन लोगों में आर्थराइटिस के साथ-साथ कैल्शियम की कमी भी पाई जाती है, उनमें दर्द और असुविधा की शिकायतें अपेक्षाकृत अधिक गंभीर हो सकती हैं। इसलिए जोड़ों के रोगों के उपचार में पोषण संबंधी कारकों का मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • 9. British Medical Journal (BMJ) और NHS, UK

    ब्रिटेन में किए गए बड़े पैमाने के अध्ययनों में आहार और मस्कुलोस्केलेटल स्वास्थ्य के बीच संबंधों का विश्लेषण किया गया। इन अध्ययनों में पाया गया कि लंबे समय तक कैल्शियम की अपर्याप्त मात्रा लेने वाले लोगों में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

    इसके विपरीत जिन लोगों ने संतुलित मात्रा में कैल्शियम का सेवन बनाए रखा, उनमें उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों की समस्याएं अपेक्षाकृत कम देखी गईं।

  • 10. Indian Council of Medical Research (ICMR)

    ICMR और National Institute of Nutrition द्वारा किए गए अध्ययनों में पाया गया कि भारत में कैल्शियम और विटामिन D की कमी एक व्यापक समस्या है। इसका एक प्रमुख कारण असंतुलित आहार और पर्याप्त धूप का अभाव माना जाता है।

    रिपोर्टों के अनुसार यदि बचपन और युवावस्था में पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो हड्डियों का विकास अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंच पाता। इसका प्रभाव आगे चलकर कम उम्र में ही पीठ दर्द, घुटनों के दर्द और अन्य मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं के रूप में दिखाई दे सकता है।

सभी शोधों का सार

इन सभी अध्ययनों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि कैल्शियम हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर भी सहमत हैं कि जोड़ों का दर्द केवल कैल्शियम की कमी के कारण नहीं होता। इसके पीछे विटामिन D की कमी, बढ़ती उम्र, आर्थराइटिस, मोटापा, पुरानी चोटें और अन्य कई कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

फिर भी शोध यह संकेत देते हैं कि लंबे समय तक कैल्शियम की कमी बनी रहने पर हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है, मांसपेशियों के कार्य में बदलाव आ सकता है और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को लगातार जोड़ों में दर्द बना रहता है, तो केवल अनुमान लगाने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित जांच कराना अधिक उचित माना जाता है।

निष्कर्ष

कैल्शियम की कमी जोड़ों के दर्द का एक संभावित कारण हो सकती है, लेकिन हर Joint Pain के पीछे केवल Calcium Deficiency ही जिम्मेदार नहीं होती। विशेषज्ञों की राय और विभिन्न वैज्ञानिक शोधों से यह स्पष्ट होता है कि Vitamin D की कमी, आर्थराइटिस, बढ़ता वजन, उम्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी जोड़ों के दर्द में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए लगातार जोड़ों में दर्द होने पर स्वयं अनुमान लगाने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर सही कारण की पहचान करना और उसी के अनुरूप उपचार कराना सबसे उचित कदम है।

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Written by

shiv seo

Ayurvedic Specialist · Shree Vishwshraddha Chikitshalaya, Prayagraj

Practising classical Ayurveda at Shree Vishwshraddha Chikitshalaya since 2008 — combining time-tested protocols like Ksharsutra and Panchakarma with modern clinical care for lasting, side-effect-free results.

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Medical disclaimer: This article is for general education only and is not a medical diagnosis. Every patient is different — please consult Dr. Ashutosh or Dr. Akanksha (or your own physician) before starting any treatment.
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