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क्या बैठकर काम करने से Piles होता है? वैज्ञानिक शोध, मेडिकल तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पूरी सच्चाई

क्या बैठकर काम करने से Piles होता है? वैज्ञानिक शोध, मेडिकल तथ्य और विशेषज्ञों की राय

आज के डिजिटल युग में लोगों की जीवनशैली और कार्य करने के तरीके में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। वर्तमान समय में लाखों लोग प्रतिदिन 8 से 12 घंटे या उससे भी अधिक समय तक लगातार बैठकर काम करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र से जुड़े पेशेवर, कार्यालय कर्मचारी, वाहन चालक, विद्यार्थी, ऑनलाइन गेमर्स तथा वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले लोग अपने दिन का अधिकांश हिस्सा कुर्सी पर बैठे हुए बिताते हैं। आधुनिक कार्यशैली ने जहां उत्पादकता को बढ़ाया है, वहीं इससे जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दिया है। इन्हीं स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं में से एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने से पाइल्स (बवासीर) होने का खतरा बढ़ जाता है? यह सवाल आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हो गया है, क्योंकि बढ़ती निष्क्रिय जीवनशैली (Sedentary Lifestyle) और शारीरिक गतिविधियों में कमी को अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण माना जा रहा है।


यह विषय केवल आम लोगों की जिज्ञासा तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी लंबे समय से शोध और अध्ययन का विषय बना हुआ है। दुनिया भर के अनेक मेडिकल संस्थानों, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स, कोलोरेक्टल सर्जनों तथा शोधकर्ताओं ने यह जानने का प्रयास किया है कि लंबे समय तक बैठे रहने, रक्त परिसंचरण में आने वाले बदलावों और पाइल्स के विकास के बीच कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध मौजूद है या नहीं। हालांकि, इस विषय को लेकर लोगों के बीच कई प्रकार की धारणाएं और भ्रांतियां भी प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि केवल लंबे समय तक बैठना ही पाइल्स का मुख्य कारण है, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मत है कि इसके पीछे कब्ज, शौच के दौरान अत्यधिक जोर लगाना, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित आहार जैसे अनेक कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए इस विषय को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।


इस लेख में हम विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध अध्ययनों, चिकित्सा विशेषज्ञों की राय, वैज्ञानिक तथ्यों तथा उपलब्ध मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर विस्तार से समझेंगे कि लंबे समय तक बैठकर काम करने और पाइल्स के बीच वास्तव में क्या संबंध है। साथ ही यह भी जानेंगे कि किन परिस्थितियों में बैठकर काम करना पाइल्स के जोखिम को बढ़ा सकता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हो सकते हैं और इससे बचाव के लिए कौन-कौन से प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं।


यह जानकारी Vishw Shraddha Hospital के संस्थापक एवं प्रसिद्ध आयुर्वेदिक पाइल्स विशेषज्ञ श्री अशुतोष श्रीवास्तव जी के चिकित्सीय अनुभव, मार्गदर्शन तथा पाइल्स रोगियों के उपचार संबंधी उनके दीर्घकालिक अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसे गुदा रोगों के उपचार क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों तक शोध-आधारित, संतुलित और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे इस विषय को तथ्यों के आधार पर समझ सकें और अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बन सकें।


बैठकर काम करने और पाइल्स के बीच क्या संबंध है?


 


पाइल्स, जिसे सामान्य भाषा में बवासीर भी कहा जाता है, गुदा (Anus) और मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में स्थित रक्त वाहिकाओं (Veins) की असामान्य सूजन और फैलाव की स्थिति है। सामान्य परिस्थितियों में ये रक्त वाहिकाएं मल त्याग की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन जब इन पर लगातार या अत्यधिक दबाव पड़ता है, तो इनमें सूजन विकसित होने लगती है। समय के साथ यह सूजन बढ़कर पाइल्स का रूप ले सकती है, जिससे प्रभावित व्यक्ति को दर्द, खुजली, जलन, रक्तस्राव तथा मल त्याग के दौरान असुविधा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


यही कारण है कि चिकित्सा विशेषज्ञ उन सभी कारकों का गहन अध्ययन करते हैं, जो गुदा और मलाशय की नसों पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकते हैं। इन्हीं संभावित कारकों में लंबे समय तक लगातार बैठे रहना भी शामिल है, जिस पर पिछले कई वर्षों में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों द्वारा शोध किए गए हैं।


अमेरिका के National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) द्वारा प्रकाशित चिकित्सीय जानकारी के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहना और विशेष रूप से लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहना पाइल्स के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक माना जाता है। संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठा रहता है, तो गुदा क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं पर निरंतर दबाव पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र में रक्त का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे नसों में सूजन बढ़ने लगती है और पाइल्स विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।


इस निष्कर्ष का समर्थन कई अन्य प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों द्वारा भी किया गया है। उदाहरण के लिए, Mayo Clinic के विशेषज्ञों ने अपने वर्ष 2025 के अद्यतन मेडिकल रिव्यू में उल्लेख किया है कि लंबे समय तक बैठे रहने की आदत निचले मलाशय की नसों पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकती है। यह बढ़ा हुआ दबाव रक्त वाहिकाओं में सूजन को बढ़ावा देता है, जो समय के साथ पाइल्स के विकास में योगदान देने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बन सकता है।


हालांकि, यह समझना भी आवश्यक है कि केवल लंबे समय तक बैठना ही पाइल्स होने का एकमात्र कारण नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार पाइल्स एक बहु-कारकीय (Multifactorial) समस्या है, जिसके पीछे कई कारण एक साथ कार्य कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, पुरानी कब्ज, मल त्याग के दौरान अत्यधिक जोर लगाना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, फाइबर युक्त आहार की कमी, मोटापा, गर्भावस्था तथा शारीरिक गतिविधियों का अभाव भी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।


इसीलिए यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बैठकर काम करता है और साथ ही उसकी जीवनशैली में नियमित व्यायाम की कमी, अपर्याप्त जल सेवन तथा कब्ज जैसी समस्याएं भी मौजूद हैं, तो पाइल्स विकसित होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। यही कारण है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान केवल एक कारण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय व्यक्ति की संपूर्ण जीवनशैली और दैनिक आदतों का मूल्यांकन करने पर जोर देता है। पाइल्स के जोखिम को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन तथा लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना महत्वपूर्ण माना जाता है।


इस विषय पर हुए वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?


लंबे समय तक बैठकर काम करने और पाइल्स (बवासीर) के बीच संभावित संबंध को समझने के लिए पिछले कई वर्षों में दुनिया भर के शोधकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों ने अनेक अध्ययन किए हैं। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) को देखते हुए यह विषय चिकित्सा विज्ञान के लिए विशेष रुचि का क्षेत्र बन गया है। यही कारण है कि विभिन्न देशों के शोध संस्थानों ने यह जानने का प्रयास किया है कि लंबे समय तक बैठे रहने की आदत मानव शरीर, विशेष रूप से गुदा और मलाशय क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं, पर किस प्रकार प्रभाव डालती है। इसी क्रम में वर्ष 2025 में अमेरिका में किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने चिकित्सा समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। इस अध्ययन के निष्कर्षों को बाद में PLOS One से संबंधित रिपोर्टों और विभिन्न स्वास्थ्य मंचों पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बनाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग टॉयलेट पर बैठकर मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, उनमें पाइल्स विकसित होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक देखा गया। अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले अधिकांश लोग टॉयलेट सीट पर अपेक्षाकृत अधिक समय तक बैठे रहते थे। परिणामस्वरूप गुदा और मलाशय क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता था, जिससे नसों में सूजन विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।


यह अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि केवल बैठना ही समस्या नहीं है, बल्कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना अधिक चिंताजनक हो सकता है। जब कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक समय तक बैठा रहता है, तो शरीर के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिसका असर गुदा क्षेत्र की नसों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ अनावश्यक रूप से लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने से बचने की सलाह देते हैं। इसके अतिरिक्त, कई गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स और कोलोरेक्टल विशेषज्ञों ने अपने नैदानिक अनुभवों के आधार पर यह पाया है कि आधुनिक कार्यालयों में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले कर्मचारियों में पाइल्स, कब्ज तथा श्रोणि क्षेत्र (Pelvic Region) से संबंधित समस्याएं अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियों की कमी रहने पर रक्त परिसंचरण की गति प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के निचले हिस्से की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ने लगता है, जो पाइल्स के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में से एक हो सकता है।


इसी विषय को और बेहतर ढंग से समझने के लिए वर्ष 2017 में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थित समीक्षा (Systematic Review) का भी उल्लेख किया जाता है। इस समीक्षा में कार्यस्थलों पर लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को समग्र स्वास्थ्य के लिए संभावित रूप से हानिकारक बताया गया था। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के बजाय नियमित अंतराल पर खड़े होना, कुछ कदम चलना और हल्की शारीरिक गतिविधियां करना शरीर की नसों तथा रक्त प्रवाह के लिए लाभकारी हो सकता है। उनका मानना था कि इस प्रकार की छोटी-छोटी गतिविधियां रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाए रखने में सहायता कर सकती हैं। हालांकि, इन सभी अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय का समग्र निष्कर्ष यह नहीं है कि केवल बैठना ही पाइल्स का प्रत्यक्ष कारण है। बल्कि अधिकांश शोध यह संकेत देते हैं कि लंबे समय तक निष्क्रिय बैठे रहना, कम शारीरिक गतिविधि, कब्ज, अपर्याप्त जल सेवन और अन्य जीवनशैली संबंधी कारकों के साथ मिलकर पाइल्स के जोखिम को बढ़ा सकता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो बैठना स्वयं में एकमात्र कारण नहीं है, लेकिन यह उन महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में अवश्य शामिल है जो समय के साथ पाइल्स के विकास में योगदान दे सकते हैं। यही कारण है कि चिकित्सा विशेषज्ञ सक्रिय जीवनशैली अपनाने, नियमित रूप से चलने-फिरने और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचने की सलाह देते हैं।


किन लोगों में बैठकर काम करने के कारण पाइल्स का खतरा अधिक होता है?


हालांकि पाइल्स किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के अनुसार कुछ विशेष वर्गों में इसका जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है। इसका मुख्य कारण उनकी दैनिक जीवनशैली, कार्य करने का तरीका और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत हो सकती है। विशेष रूप से ऐसे लोग, जिनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियां सीमित होती हैं, उन्हें इस समस्या के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। सबसे पहले कार्यालयों में कार्य करने वाले कर्मचारियों की बात करें तो उन्हें प्रतिदिन कई घंटों तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करना पड़ता है। कंप्यूटर आधारित कार्यों में लगे कर्मचारी अक्सर अपने कार्यभार के कारण लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं, जिससे शरीर की प्राकृतिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। समय के साथ यह आदत शरीर के निचले हिस्से की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकती है।


इसी प्रकार वाहन चालकों को भी अपने कार्य के दौरान लंबे समय तक बैठे रहना पड़ता है। चाहे वे ट्रक चालक हों, बस चालक हों या टैक्सी एवं कैब सेवाओं से जुड़े हों, उन्हें कई-कई घंटों तक लगातार यात्रा करनी पड़ती है। लगातार बैठने और सीमित शारीरिक गतिविधियों के कारण उनके शरीर में रक्त परिसंचरण प्रभावित हो सकता है, जो पाइल्स के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल माना जाता है। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं में भी यह समस्या देखने को मिल सकती है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में अनेक विद्यार्थी प्रतिदिन कई घंटों तक बैठकर अध्ययन करते हैं। परीक्षा की तैयारी के दौरान अक्सर उनकी शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, जिससे कब्ज और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है। यही स्थितियां आगे चलकर पाइल्स के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।


वहीं, वर्क-फ्रॉम-होम संस्कृति के बढ़ने के बाद घर से काम करने वाले लोगों की जीवनशैली में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। पहले जहां लोगों को कार्यालय आने-जाने, सीढ़ियां चढ़ने या दिनभर में कई बार चलने-फिरने का अवसर मिल जाता था, वहीं घर से काम करने के दौरान कई लोग लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं। परिणामस्वरूप उनकी दैनिक शारीरिक गतिविधि पहले की तुलना में काफी कम हो सकती है, जिसका प्रभाव समग्र स्वास्थ्य पर पड़ता है। हालांकि केवल लंबे समय तक बैठना ही जोखिम को नहीं बढ़ाता, बल्कि कुछ अन्य कारक भी इस स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कब्ज की समस्या है, उसका वजन सामान्य से अधिक है, वह पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता, उसके भोजन में फाइबर की कमी है या उसे नियमित रूप से भारी वजन उठाने की आदत है, तो पाइल्स विकसित होने की संभावना और बढ़ सकती है। ये सभी कारक गुदा और मलाशय की नसों पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे सूजन की स्थिति पैदा हो सकती है।


इसी कारण चिकित्सा विशेषज्ञ पाइल्स को केवल एक कारण से उत्पन्न होने वाली समस्या नहीं मानते, बल्कि इसे कई जोखिम कारकों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम बताते हैं। यही बात प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की रिपोर्टों में भी देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) तथा Mayo Clinic दोनों ने अपनी चिकित्सीय रिपोर्टों में कब्ज, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत, कम फाइबर वाला भोजन, बढ़ती उम्र और निष्क्रिय जीवनशैली को पाइल्स के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन जोखिम कारकों को समय रहते नियंत्रित किया जाए, तो पाइल्स विकसित होने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


इसीलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, फाइबर युक्त संतुलित आहार लेने और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचने की सलाह देते हैं। ये सरल लेकिन प्रभावी आदतें न केवल पाइल्स के जोखिम को कम करने में सहायता कर सकती हैं, बल्कि संपूर्ण पाचन स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। 


पाइल्स से बचाव के लिए क्या करें? विशेषज्ञों की सलाह


हालांकि लंबे समय तक बैठकर काम करना आधुनिक जीवनशैली का एक सामान्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल और प्रभावी आदतों को अपनाकर पाइल्स (बवासीर) के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि इनमें से अधिकांश उपाय दैनिक जीवन में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं और ये केवल पाइल्स से बचाव ही नहीं करते, बल्कि संपूर्ण पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भी सहायता करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रत्येक 45 से 60 मिनट के बाद कम से कम कुछ मिनट के लिए उठकर टहलना चाहिए या हल्की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। ऐसा करने से शरीर के निचले हिस्से में रक्त का प्रवाह बेहतर बना रहता है और नसों पर लगातार पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। विशेष रूप से कार्यालयों में कार्य करने वाले कर्मचारी, विद्यार्थी, ड्राइवर और वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले लोगों के लिए यह आदत अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।


शारीरिक गतिविधि के साथ-साथ खानपान की भूमिका भी पाइल्स की रोकथाम में महत्वपूर्ण होती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना पाचन तंत्र को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है और मल को नरम रखने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन भी आवश्यक माना जाता है। फल, हरी सब्जियां, सलाद, दालें, साबुत अनाज, ओट्स तथा अन्य रेशेदार खाद्य पदार्थ मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं, जिससे कब्ज की संभावना कम होती है। चूंकि कब्ज पाइल्स के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है, इसलिए संतुलित आहार को विशेष महत्व दिया जाता है।


इसी संदर्भ में प्रमुख चिकित्सा संस्थान Mayo Clinic और National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) भी अपनी चिकित्सीय गाइडलाइंस में फाइबर का सेवन बढ़ाने, पर्याप्त पानी पीने और कब्ज से बचने पर विशेष जोर देते हैं। इन संस्थानों के विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मल त्याग के दौरान अत्यधिक जोर लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गुदा और मलाशय की नसों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। साथ ही, टॉयलेट सीट पर आवश्यकता से अधिक समय तक बैठे रहने की आदत को भी पाइल्स के जोखिम से जोड़ा गया है।


हाल के वर्षों में एक और आदत विशेषज्ञों की चिंता का विषय बनी है, और वह है टॉयलेट में मोबाइल फोन का उपयोग करना। कई लोग समाचार पढ़ने, सोशल मीडिया देखने या वीडियो देखने के लिए टॉयलेट में मोबाइल फोन साथ ले जाते हैं। हालांकि यह आदत सामान्य प्रतीत हो सकती है, लेकिन शोधों में पाया गया है कि मोबाइल फोन के उपयोग के कारण लोग अनजाने में टॉयलेट पर अधिक समय तक बैठे रहते हैं। इससे गुदा क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है, जो समय के साथ पाइल्स के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ टॉयलेट में मोबाइल फोन के उपयोग से बचने की सलाह देते हैं। इन सभी सावधानियों के बावजूद यदि किसी व्यक्ति को पाइल्स के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मल त्याग के दौरान दर्द, गुदा क्षेत्र में खुजली, जलन, सूजन, रक्तस्राव या किसी प्रकार की गांठ महसूस होना ऐसे संकेत हो सकते हैं जिनके लिए चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक हो सकता है। शुरुआती अवस्था में समस्या की पहचान होने पर उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है और जटिलताओं की संभावना भी कम हो सकती है।


इसीलिए विशेषज्ञ समय पर निदान और उचित चिकित्सा को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। Vishw Shraddha Hospital में पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसे गुदा रोगों के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से जांच एवं उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल के संस्थापक श्री अशुतोष श्रीवास्तव कई वर्षों से पाइल्स रोगियों के उपचार से जुड़े हुए हैं। उनके चिकित्सीय अनुभव के अनुसार यदि रोग की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए और रोगी जीवनशैली में आवश्यक सुधारों के साथ उचित चिकित्सा प्राप्त करे, तो अनेक मामलों में स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। उनका मानना है कि समय पर उपचार, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से कई रोगियों को अधिक जटिल उपचार प्रक्रियाओं की आवश्यकता से भी बचाया जा सकता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि लंबे समय तक बैठकर काम करना अपने आप में पाइल्स का एकमात्र कारण नहीं है, लेकिन यह उन महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में अवश्य शामिल है जो अन्य कारणों के साथ मिलकर समस्या की संभावना को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सक्रिय जीवनशैली अपनाना, स्वस्थ खानपान बनाए रखना और शरीर के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लेना पाइल्स की रोकथाम तथा बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 


निष्कर्ष


वैज्ञानिक शोधों और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह कहा जा सकता है कि लंबे समय तक बैठकर काम करना पाइल्स का प्रत्यक्ष कारण भले न हो, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक अवश्य है। यदि इसके साथ कब्ज, कम शारीरिक गतिविधि, मोटापा और खराब खानपान जैसी समस्याएं भी जुड़ जाएं तो पाइल्स होने की संभावना बढ़ सकती है।

इसलिए यदि आपका अधिकांश समय बैठकर काम करने में गुजरता है तो समय-समय पर चलना, फाइबर युक्त भोजन लेना, पर्याप्त पानी पीना और नियमित व्यायाम करना बेहद आवश्यक है। पाइल्स के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर अनुभवी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


FAQ – बैठकर काम करने और पाइल्स से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या केवल बैठकर काम करने से पाइल्स हो जाता है?

नहीं। केवल बैठना पाइल्स का एकमात्र कारण नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है। कब्ज, मोटापा, कम फाइबर वाला भोजन और शारीरिक निष्क्रियता भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

कितने घंटे लगातार बैठना नुकसानदायक माना जाता है?

विशेषज्ञ प्रत्येक 45 से 60 मिनट के बाद कुछ मिनट चलने-फिरने की सलाह देते हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से शरीर की नसों पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या ऑफिस कर्मचारियों में पाइल्स अधिक पाया जाता है?

कई अध्ययनों और चिकित्सकीय अवलोकनों में लंबे समय तक बैठे रहने वाले कर्मचारियों में पाइल्स का जोखिम अधिक देखा गया है, विशेषकर यदि वे पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते।

क्या मोबाइल लेकर टॉयलेट में बैठना पाइल्स बढ़ा सकता है?

हाल के अमेरिकी शोधों में पाया गया है कि टॉयलेट पर मोबाइल उपयोग करने वाले लोग अधिक समय तक बैठे रहते हैं और उनमें पाइल्स का जोखिम अधिक देखा गया।

पाइल्स से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?

पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त भोजन लेना, कब्ज से बचना, नियमित व्यायाम करना और लंबे समय तक लगातार न बैठना सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं।