अपने आज के इस लेख को प्रारम्भ करने से पूर्व हम आपको यह बता दें कि यह लेख पूर्णतः विषय-विशेषज्ञों के परामर्श द्वारा तैयार किया गया है, जिनमें हमारे विश्वश्रद्धा हॉस्पिटल के संस्थापक डॉक्टर आशुतोष श्रीवास्तव भी सम्मिलित हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार हेतु सम्मानित भी किया जा चुका है। इस लेख का मुख्य उद्देश्य भगंदर जैसे गंभीर रोग से पीड़ित रोगियों तक सही जानकारी पहुँचाना तथा उन्हें भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचाना है।
इस ब्लॉग में हम विस्तारपूर्वक समझेंगे कि भगंदर बार-बार क्यों होता है, इसके पीछे कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं, किन लोगों में यह अधिक पाया जाता है, इसे दोबारा होने से कैसे रोका जा सकता है तथा इसका उचित उपचार क्या है। आइए, प्रारम्भ करते हैं।
भगंदर क्या है?
गुदभगंदर (Anal Fistula), जिसे सामान्य बोलचाल की भाषा में भगंदर कहा जाता है, गुदप्रदेश के आसपास उत्पन्न होने वाला एक गंभीर विकार है। यह रोग तब उत्पन्न होता है जब गुदा के भीतर संक्रमण अथवा फुंसी (विद्रधि) बन जाती है और उसका समुचित उपचार नहीं हो पाता। कालांतर में भीतर से बाहर तक एक सूक्ष्म नलिका अथवा मार्ग निर्मित हो जाता है, जिससे मवाद या दूषित द्रव निरंतर निकलता रहता है।
प्रारम्भ में अधिकांश लोग इसे साधारण फोड़ा अथवा अर्श (बवासीर) समझकर उपेक्षित कर देते हैं, किन्तु समय पर उपचार न मिलने पर यह अत्यंत पीड़ादायक एवं जटिल रोग का रूप धारण कर लेता है।
भगंदर गुदा के आंतरिक भाग एवं बाह्य त्वचा के मध्य बनने वाली एक अस्वाभाविक सुरंग अथवा नलिका है। जब गुदप्रदेश की ग्रंथियों में जीवाणु संक्रमण फैलता है, तब वहाँ विद्रधि उत्पन्न हो जाती है। यदि यह विद्रधि पूर्णतः स्वस्थ न हो सके, तो भीतर एक स्थायी मार्ग बन जाता है, जिसे भगंदर कहा जाता है।
यह रोग स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक पाया जाता है तथा सामान्यतः 20 से 50 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में इसकी संभावना अधिक रहती है।
भगंदर होने के प्रमुख कारण
1. गुदप्रदेश में संक्रमण
गुदा के आसपास जीवाणुओं के संक्रमण के कारण विद्रधि उत्पन्न हो सकती है, जो आगे चलकर भगंदर का रूप धारण कर लेती है।
2. पुरानी विद्रधि (फोड़ा)
यदि गुदप्रदेश के समीप उत्पन्न फोड़े का समुचित शोधन एवं उपचार न किया जाए, तो वह भगंदर में परिवर्तित हो सकता है।
3. दीर्घकालिक कब्ज
निरंतर कब्ज रहने से मलत्याग के समय अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे सूजन एवं संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
4. दुर्बल पाचन शक्ति
असंतुलित आहार, अत्यधिक मसालेदार भोजन तथा अव्यवस्थित जीवनचर्या भी इस रोग के प्रमुख कारणों में सम्मिलित हैं।
5. आंत्र संबंधी रोग
क्रोहन रोग (Crohn’s Disease) जैसे आंत्र विकारों में भगंदर होने की संभावना अधिक रहती है।
6. मधुमेह एवं दुर्बल प्रतिरक्षा शक्ति
मधुमेह से पीड़ित अथवा जिन व्यक्तियों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें संक्रमण तीव्र गति से फैलता है।
भगंदर के लक्षण
भगंदर के प्रारम्भिक लक्षण साधारण फोड़े के समान प्रतीत हो सकते हैं, किन्तु समय के साथ यह अधिक गंभीर हो जाते हैं।
प्रमुख लक्षण
- गुदप्रदेश के आसपास निरंतर पीड़ा होना
- सूजन अथवा गांठ का अनुभव होना
- मवाद अथवा रक्तस्राव होना
- दुर्गंधयुक्त द्रव का निकलना
- बैठने में अत्यधिक कष्ट होना
- खुजली एवं दाह की अनुभूति होना
- बार-बार फोड़ा उत्पन्न होना
- ज्वर एवं दुर्बलता अनुभव होना
यदि दीर्घकाल तक गुदप्रदेश से मवाद का स्राव होता रहे, तो यह भगंदर का प्रमुख संकेत हो सकता है।
भगंदर एवं अर्श (बवासीर) में अंतर
अनेक लोग भगंदर एवं अर्श को एक ही रोग समझ लेते हैं, जबकि दोनों पूर्णतः भिन्न हैं।
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भगंदर |
अर्श (बवासीर) |
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इसमें मवाद एवं संक्रमण होता है |
इसमें सूजी हुई नसें होती हैं |
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गुदा से दूषित द्रव निकलता है |
मलत्याग के समय रक्तस्राव होता है |
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फोड़ा एवं तीव्र पीड़ा होती है |
जलन एवं सूजन अधिक होती है |
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भीतर सुरंग जैसी नलिका बन जाती है |
नसों में सूजन उत्पन्न होती है |
भगंदर का उपचार
1. शल्यचिकित्सा
भगंदर का सर्वाधिक सामान्य एवं प्रभावी उपचार शल्यक्रिया है। इसमें संक्रमित नलिका को निकाल दिया जाता है।
2. क्षारसूत्र चिकित्सा
यह आयुर्वेद की प्राचीन एवं प्रसिद्ध पद्धति है, जिसमें औषधीय सूत्र (धागे) के माध्यम से भीतर बनी नलिका को धीरे-धीरे स्वस्थ किया जाता है। भारत में यह उपचार अत्यंत लोकप्रिय एवं प्रभावकारी माना जाता है।
3. लेज़र चिकित्सा
आधुनिक चिकित्सा पद्धति में लेज़र तकनीक के माध्यम से कम पीड़ा एवं शीघ्र स्वास्थ्य लाभ वाला उपचार किया जाता है।
4. औषधियाँ एवं प्रतिजैविक (Antibiotics)
प्रारम्भिक संक्रमण की अवस्था में चिकित्सक औषधियाँ प्रदान करते हैं, किन्तु केवल औषधियों से स्थायी उपचार सदैव संभव नहीं होता।
उपचार के पश्चात आवश्यक सावधानियाँ
- स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
- कब्ज से बचें
- पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करें
- रेशेयुक्त (फाइबर युक्त) आहार ग्रहण करें
- अत्यधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें
- चिकित्सक के निर्देशानुसार औषधियों का सेवन करें
भगंदर से बचाव कैसे करें?
भगंदर से बचने हेतु संतुलित जीवनशैली एवं स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है।
बचाव के उपाय
- प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में जल पिएँ
- कब्ज को उत्पन्न न होने दें
- गुदप्रदेश की नियमित स्वच्छता बनाए रखें
- लंबे समय तक निरंतर बैठे न रहें
- फोड़ा होने पर तुरंत उपचार कराएँ
- जंक फूड एवं अत्यधिक मसालेदार भोजन का सेवन कम करें
उपसंहार
आज के समय में जहाँ विश्वभर में एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभावों से संबंधित समाचार निरंतर सुनने को मिलते रहते हैं, वहीं लोगों का विश्वास धीरे-धीरे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर बढ़ता जा रहा है। इसी कारण अनेक लोग पुनः आयुर्वेदिक चिकित्सा को अपनाने लगे हैं।
विश्वश्रद्धा हॉस्पिटल प्रयागराज में रोगियों को श्रेष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से भगंदर का उपचार उपलब्ध कराया जाता है। यदि आप भी इस समस्या से पीड़ित हैं, तो चिंता न करें। आज ही हमारी वेबसाइट पर दिए गए संपर्क नंबर के माध्यम से हमारी टीम से संपर्क करें और किफायती शुल्क में भगंदर का संपूर्ण आयुर्वेदिक उपचार प्राप्त करें।
भगंदर (Anal Fistula) से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बवासीर में गुदा की नसें सूज जाती हैं और अक्सर खून आता है, जबकि भगंदर में संक्रमण होता है और गुदा से मवाद या बदबूदार द्रव निकलता है।
नहीं, भगंदर सामान्यतः अपने आप ठीक नहीं होता। इसका सही इलाज दवाओं, सर्जरी या अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से ही संभव होता है।
भगंदर का सबसे प्रभावी इलाज सर्जरी, लेजर उपचार और क्षारसूत्र चिकित्सा माना जाता है। मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर उपचार तय करते हैं।
कब्ज से बचना, साफ-सफाई रखना, फाइबर युक्त आहार लेना, पर्याप्त पानी पीना और फोड़े का समय पर इलाज करना इसके प्रमुख बचाव उपाय हैं।
अगर गुदा से लगातार मवाद निकल रहा हो, दर्द या सूजन लंबे समय तक बनी रहे तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
