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फिस्टुला क्या है और आयुर्वेद में इसका इलाज कैसे किया जाता है? जानिए विश्व श्रद्धा हॉस्पिटल की विशेषज्ञ राय

Jun 11, 2026 shiv seo 1 min read Health
फिस्टुला क्या है और आयुर्वेद में इसका इलाज कैसे किया जाता है?

फिस्टुला क्या है और आयुर्वेद में इसका इलाज कैसे किया जाता है? जानिए विश्व श्रद्धा हॉस्पिटल की विशेषज्ञ राय

फिस्टुला एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में ज्यादातर लोग तब तक गंभीरता से नहीं सोचते, जब तक इसके लक्षण उन्हें खुद परेशान करना शुरू नहीं कर देते। शुरुआत में गुदा (Anus) के आसपास बार-बार फोड़ा बनना, उसमें से मवाद या पानी निकलना, लगातार दर्द रहना या बैठने में असुविधा महसूस होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। कई लोग इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि समय रहते सही इलाज न कराया जाए तो यही समस्या धीरे-धीरे जटिल रूप ले सकती है।

विश्व श्रद्धा हॉस्पिटल, झूंसी (प्रयागराज) में आने वाले कई मरीज ऐसे होते हैं जो महीनों या वर्षों तक इस परेशानी को सहने के बाद उपचार के लिए पहुंचते हैं। हमारे संस्थापक एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि फिस्टुला केवल त्वचा पर बना एक घाव नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर बनने वाली एक असामान्य नलिका (Abnormal Tract) होती है, जिसका सही तरीके से मूल्यांकन और उपचार करना बेहद जरूरी है।

इसी वजह से आयुर्वेद में इस रोग को केवल बाहरी लक्षणों तक सीमित नहीं माना जाता। उपचार शुरू करने से पहले मरीज की पाचन शक्ति, संक्रमण की प्रकृति, शरीर की स्थिति और उसकी दैनिक जीवनशैली को भी ध्यान से समझा जाता है। क्योंकि हर व्यक्ति की समस्या अलग होती है, इसलिए सभी मरीजों के लिए एक जैसा इलाज प्रभावी नहीं हो सकता।

फिस्टुला के उपचार को लेकर वैज्ञानिक शोध और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

पिछले कुछ दशकों में फिस्टुला (Anal Fistula) के उपचार को लेकर भारत सहित दुनिया के कई चिकित्सा संस्थानों में लगातार शोध किए गए हैं। इन शोधों का मुख्य उद्देश्य यह समझना रहा है कि फिस्टुला के इलाज में कौन-सी तकनीक मरीज को लंबे समय तक बेहतर परिणाम दे सकती है और दोबारा होने (Recurrence) की संभावना को कैसे कम किया जा सकता है।

आयुर्वेद में फिस्टुला को भगंदर कहा गया है और इसका उल्लेख हजारों वर्ष पहले आचार्य सुश्रुत ने अपने ग्रंथों में किया था। आधुनिक समय में इसी सिद्धांत पर आधारित क्षारसूत्र चिकित्सा (Kshar Sutra Therapy) को वैज्ञानिक रूप से परखने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं।

  • गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर का महत्वपूर्ण अध्ययन

    साल 2017 में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर के शोधकर्ताओं ने फिस्टुला के मरीजों पर एक अध्ययन किया, जिसमें Transrectal Ultrasonography (TRUS) जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करके यह देखा गया कि क्षारसूत्र उपचार के बाद शरीर के अंदर मौजूद फिस्टुला ट्रैक में क्या बदलाव आते हैं। इस अध्ययन में पाया गया कि उपचार के दौरान फिस्टुला ट्रैक धीरे-धीरे समाप्त होता गया और अधिकांश मरीजों में संक्रमण तथा डिस्चार्ज जैसी समस्याओं में स्पष्ट सुधार देखने को मिला।

  • 2018 में 42 मरीजों पर किया गया तुलनात्मक शोध

    साल 2018 में एक अन्य अध्ययन में 42 मरीजों को दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया। एक समूह का उपचार केवल क्षारसूत्र से किया गया, जबकि दूसरे समूह में आंशिक फिस्टुलेक्टॉमी (Partial Fistulectomy) के साथ क्षारसूत्र का उपयोग किया गया। शोध के दौरान यह देखा गया कि दोनों समूहों के मरीजों में दर्द, सूजन और मवाद निकलने जैसी समस्याओं में सुधार हुआ।

  • 2022 के अध्ययन में विभिन्न प्रकार के क्षारसूत्र की तुलना

    साल 2022 में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रकार के क्षारसूत्र जैसे गुग्गुलु क्षारसूत्र और शल्लकी क्षारसूत्र की तुलना की। इस शोध में पाया गया कि सभी प्रकार के क्षारसूत्र से मरीजों को लाभ मिला, लेकिन कुछ मामलों में शल्लकी आधारित क्षारसूत्र से फिस्टुला ट्रैक अपेक्षाकृत तेजी से समाप्त हुआ।

  • पपीता (Papaya Ksheera) आधारित क्षारसूत्र पर भी हुआ शोध

    कुछ भारतीय शोधकर्ताओं ने पारंपरिक क्षारसूत्र में उपयोग होने वाले तत्वों के स्थान पर पपीते के दूध (Papaya Ksheera) का उपयोग करके भी अध्ययन किया। शुरुआती परिणामों में यह तकनीक भी प्रभावी दिखाई दी और कई मरीजों में घाव भरने तथा संक्रमण नियंत्रित करने में सकारात्मक परिणाम मिले।

  • 2024 की समीक्षा में क्या सामने आया?

    साल 2024 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक समीक्षा (Systematic Review) में अब तक हुए कई अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि क्षारसूत्र चिकित्सा पर उपलब्ध अधिकांश शोध सकारात्मक परिणाम दिखाते हैं और कई मरीजों में दोबारा फिस्टुला होने की संभावना कम देखी गई।

  • अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा जगत की क्या राय है?

    दुनिया भर की चिकित्सा संस्थाएं यह मानती हैं कि फिस्टुला का उपचार मरीज की स्थिति और फिस्टुला के प्रकार के अनुसार तय किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के साथ-साथ भारत में क्षारसूत्र चिकित्सा को भी एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जाता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां विशेषज्ञ इसे उपयुक्त समझते हैं।

विश्व श्रद्धा हॉस्पिटल की विशेषज्ञ राय

विश्व श्रद्धा हॉस्पिटल, झूंसी (प्रयागराज) के संस्थापक एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव का मानना है कि फिस्टुला का सफल उपचार केवल किसी एक प्रक्रिया या दवा पर निर्भर नहीं करता। मरीज की पूरी शारीरिक स्थिति, संक्रमण की गंभीरता, खान-पान, पाचन शक्ति और जीवनशैली को समझकर ही उपचार की सही योजना बनाई जानी चाहिए।

उनके अनुसार यदि मरीज समय रहते विशेषज्ञ से सलाह ले, नियमित फॉलो-अप कराए और उपचार के साथ डॉक्टर द्वारा बताए गए आहार एवं जीवनशैली संबंधी निर्देशों का पालन करे, तो बेहतर परिणाम मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

निष्कर्ष

अब तक हुए वैज्ञानिक शोध और आयुर्वेदिक अध्ययनों से यह संकेत मिलता है कि फिस्टुला के उपचार में क्षारसूत्र जैसी आयुर्वेदिक तकनीक कई मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, लेकिन इसका चयन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह और मरीज की स्थिति के अनुसार ही किया जाना चाहिए। समय पर सही निदान, उचित उपचार और नियमित फॉलो-अप के साथ अधिकांश मरीज बेहतर स्वास्थ्य की ओर बढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या फिस्टुला बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है?

कुछ मामलों में मरीज की स्थिति के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार, क्षारसूत्र चिकित्सा और अन्य चिकित्सकीय तरीकों से फिस्टुला का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। हालांकि यह पूरी तरह फिस्टुला के प्रकार, उसकी गहराई और गंभीरता पर निर्भर करता है।

2. फिस्टुला होने का सबसे पहला लक्षण क्या होता है?

गुदा के आसपास बार-बार फोड़ा बनना, मवाद या पानी निकलना, लगातार दर्द, सूजन और बैठने में असुविधा फिस्टुला के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

3. क्या आयुर्वेद में फिस्टुला का स्थायी इलाज संभव है?

आयुर्वेद का उद्देश्य केवल लक्षणों को कम करना नहीं बल्कि रोग के मूल कारणों पर काम करना भी होता है। कई मामलों में उचित उपचार और नियमित फॉलो-अप से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

4. फिस्टुला और बवासीर में कैसे पहचान करें कि कौन-सी बीमारी है?

बवासीर में आमतौर पर गुदा की नसों में सूजन और खून आने की समस्या होती है, जबकि फिस्टुला में गुदा के आसपास एक असामान्य नलिका बन जाती है जिससे मवाद या तरल पदार्थ निकल सकता है।

5. क्या फिस्टुला बार-बार दोबारा हो सकता है?

यदि फिस्टुला का सही उपचार न किया जाए या बीच में इलाज छोड़ दिया जाए तो इसके दोबारा होने की संभावना बनी रह सकती है। इसलिए पूरा उपचार और नियमित फॉलो-अप बहुत महत्वपूर्ण होता है।

6. फिस्टुला में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?

फाइबर युक्त भोजन, ताजे फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त पानी और हल्का पचने वाला आहार फायदेमंद माना जाता है। वहीं अत्यधिक मसालेदार, तला-भुना और कब्ज पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर हो सकता है।

7. क्या कब्ज से फिस्टुला की समस्या बढ़ सकती है?

लगातार कब्ज रहने से मल त्याग के दौरान दबाव बढ़ सकता है, जिससे दर्द और असुविधा अधिक महसूस हो सकती है। इसलिए फिस्टुला के मरीजों को कब्ज से बचने के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन करना चाहिए।

8. फिस्टुला की जांच कैसे की जाती है?

डॉक्टर मरीज के लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर प्रारंभिक मूल्यांकन करते हैं। जरूरत पड़ने पर MRI, एंडोएनल अल्ट्रासाउंड या अन्य जांचों की मदद से फिस्टुला ट्रैक की स्थिति और जटिलता का पता लगाया जाता है।

9. क्या हर फिस्टुला मरीज के लिए क्षारसूत्र उपचार जरूरी होता है?

नहीं। क्षारसूत्र हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसका निर्णय फिस्टुला के प्रकार, स्थान, जटिलता और मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को देखकर विशेषज्ञ द्वारा लिया जाता है।

10. फिस्टुला ठीक होने में कितना समय लगता है?

यह पूरी तरह फिस्टुला की गंभीरता, उपचार की विधि और मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में उपचार अपेक्षाकृत जल्दी पूरा हो सकता है, जबकि जटिल मामलों में अधिक समय की आवश्यकता पड़ सकती है।

विश्व श्रद्धा हॉस्पिटल, झूंसी (प्रयागराज) में हमारा प्रयास केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि हर मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार सुरक्षित, संतुलित और समग्र चिकित्सा उपलब्ध कराना है, ताकि वह दोबारा आत्मविश्वास के साथ स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सके।

Written by

shiv seo

Ayurvedic Specialist · Shree Vishwshraddha Chikitshalaya, Prayagraj

Practising classical Ayurveda at Shree Vishwshraddha Chikitshalaya since 2008 — combining time-tested protocols like Ksharsutra and Panchakarma with modern clinical care for lasting, side-effect-free results.

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Medical disclaimer: This article is for general education only and is not a medical diagnosis. Every patient is different — please consult Dr. Ashutosh or Dr. Akanksha (or your own physician) before starting any treatment.
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