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क्या कब्ज और पाइल्स का आपस में संबंध है? विशेषज्ञों की राय, वैज्ञानिक शोध और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से विस्तृत जानकारी

Jun 9, 2026 shiv seo 1 min read Health
क्या बैठकर काम करने से Piles होता है? वैज्ञानिक शोध, मेडिकल तथ्य और विशेषज्ञों की राय

यदि आपको अक्सर कब्ज की समस्या रहती है और मल त्याग के दौरान काफी जोर लगाना पड़ता है, तो संभव है कि आपके मन में भी कभी यह सवाल आया हो कि क्या यही परेशानी आगे चलकर पाइल्स का कारण बन सकती है। यह सवाल बिल्कुल स्वाभाविक है, क्योंकि कब्ज और पाइल्स दोनों ही ऐसी समस्याएँ हैं जिनसे आज लाखों लोग परेशान हैं।

कई लोग वर्षों तक कब्ज को एक सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करते रहते हैं। शुरुआत में यह केवल पेट ठीक से साफ न होने की परेशानी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे जब शौच के दौरान दर्द, जलन, रक्तस्राव या गुदा क्षेत्र में असुविधा महसूस होने लगती है, तब चिंता बढ़ने लगती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर कब्ज और पाइल्स के बीच क्या संबंध है

चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों इस बात को स्वीकार करते हैं कि लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज पाइल्स के जोखिम को बढ़ा सकती है। हालांकि हर कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को पाइल्स नहीं होती और हर पाइल्स रोगी को कब्ज नहीं होती, लेकिन इन दोनों समस्याओं के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध अवश्य पाया जाता है।

इस लेख में हम वैज्ञानिक शोधों, विशेषज्ञों की राय और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के आधार पर समझेंगे कि कब्ज और पाइल्स का आपस में क्या संबंध है और इन दोनों समस्याओं से बचाव के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

कब्ज क्या है?

बहुत से लोग यह मानते हैं कि यदि वे रोजाना शौच जाते हैं, तो उन्हें कब्ज नहीं है। लेकिन वास्तविकता इससे थोड़ी अलग है। कब्ज केवल मल त्याग का कम होना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें मल त्याग के दौरान अत्यधिक जोर लगाना पड़ता है, मल कठोर हो जाता है, पेट पूरी तरह साफ नहीं होने का एहसास बना रहता है या सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग होता है।

यदि आपको शौच के दौरान अधिक समय लगता है, बार-बार जोर लगाना पड़ता है या पेट पूरी तरह साफ नहीं होता, तो यह कब्ज का संकेत हो सकता है।

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में फाइबर युक्त भोजन की कमी, पर्याप्त पानी न पीना, लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी कब्ज के प्रमुख कारण माने जाते हैं।

आयुर्वेद में कब्ज को मुख्य रूप से “विबंध” कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है और अपान वायु का प्रवाह प्रभावित होता है, तब मल शुष्क और कठोर होने लगता है, जिससे उसके निष्कासन में कठिनाई उत्पन्न होती है।

पाइल्स क्या है?

यदि मल त्याग के दौरान दर्द, जलन या खून आने की समस्या होने लगे, तो कई लोगों के मन में पाइल्स का डर पैदा हो जाता है। लेकिन पाइल्स वास्तव में क्या है, इसे समझना भी जरूरी है।

पाइल्स, जिसे बवासीर भी कहा जाता है, गुदा और मलाशय के निचले भाग में स्थित रक्त वाहिकाओं के सूजने और फैलने की स्थिति है। जब इन नसों पर लंबे समय तक दबाव पड़ता है, तो वे फूलने लगती हैं और पाइल्स का रूप ले सकती हैं।

आंतरिक पाइल्स (Internal Hemorrhoids)

यह गुदा के भीतर विकसित होती है। शुरुआती अवस्था में इसमें दर्द कम होता है, लेकिन मल त्याग के दौरान रक्तस्राव हो सकता है।

बाहरी पाइल्स (External Hemorrhoids)

यह गुदा के बाहरी हिस्से में विकसित होती है। इसमें दर्द, सूजन, खुजली और असुविधा अधिक महसूस हो सकती है।

क्या कब्ज और पाइल्स का आपस में सीधा संबंध है?

संक्षिप्त उत्तर है—हाँ।

यदि आपको लंबे समय से कब्ज की समस्या है और हर बार शौच के दौरान जोर लगाना पड़ता है, तो पाइल्स होने का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर कब्ज को पाइल्स के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक मानते हैं।

कब्ज होने पर मल सामान्य से अधिक कठोर हो जाता है। ऐसे में उसे बाहर निकालने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। बार-बार होने वाला यह दबाव गुदा क्षेत्र की नसों पर असर डालता है। समय के साथ नसों में सूजन आने लगती है और पाइल्स विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को पाइल्स हो जाए, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज निश्चित रूप से इस जोखिम को बढ़ा सकती है।

वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?

यदि आप सोच रहे हैं कि क्या इस संबंध को वैज्ञानिक शोध भी स्वीकार करते हैं, तो इसका उत्तर है—हाँ। दुनिया के कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों और शोधकर्ताओं ने कब्ज और पाइल्स के बीच संबंध का अध्ययन किया है।

American Society of Colon and Rectal Surgeons (ASCRS)

ASCRS की क्लिनिकल गाइडलाइंस के अनुसार मल त्याग के दौरान बार-बार जोर लगाना और लंबे समय तक कब्ज की समस्या बने रहना पाइल्स के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब व्यक्ति नियमित रूप से शौच के दौरान अधिक जोर लगाता है, तो गुदा क्षेत्र की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। समय के साथ यह दबाव नसों को प्रभावित करता है और पाइल्स विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK)

NIDDK के अनुसार लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज पाइल्स के विकास के जोखिम को बढ़ा सकती है। कठोर मल के कारण मल त्याग के दौरान अधिक प्रयास करना पड़ता है, जिससे गुदा क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। यही दबाव समय के साथ पाइल्स के विकास में योगदान दे सकता है।

World Journal of Gastroenterology में प्रकाशित अध्ययन

यदि आप यह जानना चाहते हैं कि कब्ज और पाइल्स के बीच संबंध केवल एक धारणा है या इसके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण भी मौजूद हैं, तो इस विषय पर प्रकाशित शोध काफी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

World Journal of Gastroenterology में प्रकाशित विभिन्न अध्ययनों में पाया गया कि जो लोग लंबे समय से कब्ज की समस्या से जूझ रहे थे, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में पाइल्स होने की संभावना अधिक देखी गई। शोधकर्ताओं के अनुसार जब कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है, तो व्यक्ति को बार-बार जोर लगाकर मल त्याग करना पड़ता है। यह स्थिति गुदा क्षेत्र की नसों पर अतिरिक्त दबाव पैदा करती है, जो समय के साथ पाइल्स के विकास का कारण बन सकती है।

दूसरे शब्दों में कहें तो कब्ज केवल पेट की समस्या नहीं है। यदि इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो इसका प्रभाव शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ सकता है, जिनमें गुदा क्षेत्र की नसें प्रमुख हैं।

Thomson और उनके सहकर्मियों का अध्ययन

इस विषय पर Thomson और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए अध्ययनों में भी दिलचस्प निष्कर्ष सामने आए। शोध में पाया गया कि पाइल्स से पीड़ित बड़ी संख्या में मरीजों में कब्ज, अनियमित मल त्याग की आदतें और लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहने जैसी समस्याएँ पहले से मौजूद थीं।

यह निष्कर्ष इस बात की ओर संकेत करते हैं कि कब्ज केवल पाइल्स से जुड़ा एक सहायक कारक नहीं है, बल्कि कई मामलों में यह समस्या के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यदि आपको भी शौच के दौरान अत्यधिक समय लगाना पड़ता है या बार-बार जोर लगाना पड़ता है, तो इसे केवल एक सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Gut Journal में प्रकाशित अवलोकन

ब्रिटेन की प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Gut में प्रकाशित अध्ययनों ने भी कब्ज और पाइल्स के बीच संबंध की पुष्टि की है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि पाइल्स केवल कब्ज के कारण ही नहीं होती।

मोटापा, गर्भावस्था, लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक निष्क्रियता, आनुवंशिक प्रवृत्ति और कुछ अन्य जीवनशैली संबंधी कारक भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।

फिर भी अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज पाइल्स के सबसे महत्वपूर्ण और नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक है। यही कारण है कि पाइल्स की रोकथाम और उपचार के दौरान कब्ज को नियंत्रित करने पर विशेष जोर दिया जाता है।

कब्ज किस प्रकार पाइल्स के विकास का कारण बनती है?

अब तक आपने यह समझ लिया होगा कि कब्ज और पाइल्स के बीच संबंध वास्तव में मौजूद है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब्ज शरीर में ऐसी कौन-सी प्रक्रियाएँ शुरू करती है, जो आगे चलकर पाइल्स का कारण बन जाती हैं?

इसे समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जब तक व्यक्ति कारण नहीं समझता, तब तक वह समस्या की गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ पाता।

1. मल त्याग के दौरान बार-बार जोर लगाना

यदि आपको कब्ज रहती है, तो आपने स्वयं भी महसूस किया होगा कि शौच के दौरान सामान्य से अधिक जोर लगाना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कब्ज की स्थिति में मल कठोर और सूखा हो जाता है।

जब व्यक्ति बार-बार अधिक जोर लगाता है, तो गुदा और मलाशय की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है। शुरुआत में इसका कोई विशेष प्रभाव दिखाई नहीं देता, लेकिन महीनों या वर्षों तक यही स्थिति बनी रहे तो नसों में सूजन विकसित होने लगती है।

यही सूजन आगे चलकर पाइल्स का रूप ले सकती है।

2. गुदा क्षेत्र की नसों में रक्त का जमाव

बहुत से लोग यह नहीं जानते कि लगातार जोर लगाने का असर केवल मांसपेशियों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है।

जब मल त्याग के दौरान बार-बार दबाव बनाया जाता है, तो गुदा क्षेत्र की नसों में रक्त का सामान्य प्रवाह प्रभावित होने लगता है। इसके कारण कुछ नसों में रक्त जमा होने लगता है।

समय के साथ यह जमा हुआ रक्त नसों को फैलाने और फूलने लगता है। यही कारण है कि कई लोगों में धीरे-धीरे पाइल्स विकसित हो जाती है।

3. कठोर मल द्वारा ऊतकों को नुकसान पहुँचना

कब्ज की एक और समस्या यह है कि मल अक्सर कठोर हो जाता है। जब ऐसा मल गुदा मार्ग से गुजरता है, तो वह वहाँ मौजूद संवेदनशील ऊतकों पर घर्षण पैदा कर सकता है।

यदि यह स्थिति बार-बार होती रहे, तो सूजन, जलन और छोटे-छोटे ऊतक क्षति (Micro Injuries) होने लगती हैं। कई बार इसी कारण मल त्याग के दौरान दर्द या रक्तस्राव जैसी समस्याएँ भी दिखाई देने लगती हैं।

यही वजह है कि विशेषज्ञ कब्ज को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करने की सलाह देते हैं, ताकि गुदा क्षेत्र के ऊतकों को अनावश्यक नुकसान से बचाया जा सके।

4. लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहना

आजकल एक आम आदत देखने को मिलती है—मोबाइल फोन लेकर लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहना।

कब्ज से पीड़ित लोगों में यह आदत और भी अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि उन्हें मल त्याग करने में अधिक समय लगता है।

हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने से भी गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ सकता है। यह दबाव पाइल्स के विकास में योगदान दे सकता है।

इसीलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शौचालय में केवल आवश्यक समय ही बिताना चाहिए। यदि मल त्याग नहीं हो रहा है, तो लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय बाद में पुनः प्रयास करना अधिक उचित माना जाता है।

आखिर इस पूरी प्रक्रिया को कैसे समझें?

सरल शब्दों में कहें तो कब्ज केवल पेट साफ न होने की समस्या नहीं है। जब यह लंबे समय तक बनी रहती है, तो कठोर मल, बार-बार जोर लगाना, नसों पर बढ़ता दबाव और ऊतकों को होने वाली क्षति मिलकर ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कर सकती हैं, जिनसे पाइल्स विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

यही कारण है कि डॉक्टर और आयुर्वेद विशेषज्ञ दोनों कब्ज को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करने की सलाह देते हैं। क्योंकि कई बार समय रहते उठाया गया एक छोटा कदम भविष्य में होने वाली बड़ी समस्या से बचा सकता है।

निष्कर्ष

वैज्ञानिक शोधों, चिकित्सकीय अनुभवों और आयुर्वेदिक सिद्धांतों से यह स्पष्ट होता है कि कब्ज और पाइल्स के बीच गहरा संबंध मौजूद है। लंबे समय तक रहने वाली कब्ज पाइल्स के जोखिम को बढ़ा सकती है, जबकि पाइल्स भी कई मामलों में कब्ज को और गंभीर बना सकती है। इसलिए स्वस्थ पाचन, संतुलित जीवनशैली और समय पर उपचार अपनाकर इन दोनों समस्याओं से प्रभावी रूप से बचाव किया जा सकता है।

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FAQ – कब्ज और पाइल्स का संबंध

कब्ज और पाइल्स के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

कब्ज में मल कठोर होना, पेट साफ न होना और जोर लगाना पड़ता है। पाइल्स में दर्द, सूजन, खुजली और मल त्याग के दौरान रक्तस्राव जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

कब्ज और पाइल्स से बचाव कैसे करें?

इसके लिए फाइबर युक्त आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, लंबे समय तक टॉयलेट पर न बैठें और मल त्याग को रोकने की आदत न डालें।

क्या कब्ज ठीक करने से पाइल्स में सुधार होता है?

हाँ, कब्ज को नियंत्रित करने से पाइल्स के लक्षण जैसे दर्द, सूजन और रक्तस्राव में काफी सुधार देखा जा सकता है।

क्या आयुर्वेद में कब्ज और पाइल्स का संबंध बताया गया है?

हाँ, आयुर्वेद में पाइल्स (अर्श) का मुख्य कारण कमजोर पाचन और वात दोष का असंतुलन माना गया है, जो कब्ज से जुड़ा होता है।

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Written by

shiv seo

Ayurvedic Specialist · Shree Vishwshraddha Chikitshalaya, Prayagraj

Practising classical Ayurveda at Shree Vishwshraddha Chikitshalaya since 2008 — combining time-tested protocols like Ksharsutra and Panchakarma with modern clinical care for lasting, side-effect-free results.

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